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दिल्ली हाई कोर्ट ने कश्मीरी एक्टिविस्ट खुर्रम परवेज को दी जमानत; UAPA मामले में मिली बड़ी राहत

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नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को कश्मीरी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट खुर्रम परवेज को टेरर फंडिंग और आतंकवादी साजिश के मामले में जमानत दे दी है। नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने उन पर लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए लोगों की भर्ती और भारत के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में यूएपीए (UAPA) के तहत केस दर्ज किया था। जस्टिस (Khurram Parvez Bail) नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने कुछ शर्तों के साथ उन्हें रिहाई के आदेश दिए हैं।

Khurram Parvez Bail – NIA ने 22 नवंबर, 2021 को खुर्रम परवेज को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का दावा है कि परवेज लश्कर-ए-तैयबा की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य ओवरग्राउंड वर्कर्स के जरिए आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना था। जांच के अनुसार, परवेज पर सैन्य ठिकानों की जानकारी जुटाने और बुरहान वानी की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन भड़काने का आरोप है। ट्रायल कोर्ट द्वारा 17 दिसंबर, 2024 को जमानत याचिका खारिज होने के बाद, परवेज ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

  ‘मैं एक्टिविस्ट, आतंकी नहीं’

अपनी दलीलों में खुर्रम परवेज ने स्वयं को निर्दोष बताया है। उन्होंने कहा कि वे जेकेसीसीएस (JKCCS) और एशियन फेडरेशन अगेंस्ट इनवॉलंटरी डिसअपीयरेंस (AFAD) से जुड़े एक ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट हैं। परवेज का कहना है कि:

    • जांच एजेंसियां उनका लश्कर-ए-तैयबा के किसी भी ऑपरेटिव से संपर्क साबित करने में नाकाम रही हैं।

    • जब्त किए गए उनके डिजिटल डिवाइस से कोई भी आपत्तिजनक सबूत या रिक्रूटमेंट के प्रमाण नहीं मिले हैं।

    • पाकिस्तान की उनकी पिछली यात्राएं पूरी तरह से मानवीय वकालत और लैंडमाइन के खिलाफ अभियानों से जुड़ी थीं।

       

 

 

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