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जनवरी 2021 से जून 2026 के बीच 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खतरनाक सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के कारण 332 सफाई कर्मचारियों की मौत की सूचना।

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खतरनाक तरीके से हाथ से सफाई कराने के लिए पिछले पांच वर्षों में एजेंसियों और अधिकारियों के खिलाफ 193 एफआईआर दर्ज की गईं

 

भारत सरकार ने मैनुअल स्कैवेंजर्स के तौर पर रोजगार और उनके पुनर्वास निषेध अधिनियम, 2013 (एमएस एक्ट, 2013) को सख्ती से लागू करके, प्रभावित लोगों के पुनर्वास और मशीनीकृत सफाई प्रणालियों को बढ़ावा देकर हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह खत्म करने के अपने संकल्प को फिर से दोहराया है। यह अधिनियम, जो 6 दिसंबर 2013 को लागू हुआ था, किसी भी व्यक्ति को मैनुअल स्कैवेंजर के तौर पर काम पर रखने या नियुक्त करने पर रोक लगाता है और नियमों के उल्लंघन के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करता है।

यह जानकारी आज सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने लोकसभा में सांसद डॉ. डी. रवि कुमार के एक लिखित सवाल के जवाब में दी।

सदन को दी गई जानकारी में बताया गया है कि एमएस एक्ट, 2013 की धारा 8 के तहत, अगर कोई व्यक्ति या एजेंसी किसी हाथ से मैला ढोने वाले को काम पर रखती है या उससे काम करवाती है, तो उसे दो साल तक की जेल, ₹1 लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यह इस अमानवीय प्रथा के प्रति सरकार के ज़ीरो-टॉलरेंस के रुख को मज़बूत करता है

लिखित जवाब में यह भी जानकारी दी गई है कि नेशनल कमीशन फ़ॉर सफाई कर्मचारी (एनसीएसके) से मिली जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2021 से 30 जून 2026 की अवधि के दौरान 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई करते समय 332 सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई।

लिखित उत्तर के अनुसार, कानून के प्रावधानों के तहत, खतरनाक मैनुअल सफाई के लिए ज़िम्मेदार एजेंसियों और अधिकारियों के खिलाफ संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा पिछले पांच वर्षों में 193 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए सदन को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मशीनीकृत सीवर सफ़ाई के कार्यान्वयन के संबंध में कोई अलग से मूल्यांकन नहीं किया गया है।

सदन को यह भी बताया गया कि सभी ज़िलों में किए गए हालिया सर्वेक्षणों में हाथ से मैला ढोने की प्रथा का कोई मामला सामने नहीं आया है, जो इस प्रथा को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा किए गए लगातार विधायी, प्रशासनिक और पुनर्वास प्रयासों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।

सरकार कानून के सख्ती से कार्यान्वयन, मशीनीकृत सफाई तकनीकों को बढ़ावा देने और व्यापक पुनर्वास पहलों के ज़रिए सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और उनके कल्याण के उपायों को लगातार मज़बूत से जारी रखे हुए है और मैनुअल स्कैवेंजिंग-मुक्त भारत प्राप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहरा रही है।

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