यमुनानगर : खेड़ी लक्खा सिंह में हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच में STF करनाल ने एक बड़ा खुलासा किया है। जांच में तत्कालीन जेल अधीक्षक विशाल छिब्बर और हैड वार्डर दीप चंद की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि इन्होंने जेल में बंद कुख्यात बदमाश काला राणा को मोबाइल फोन उपलब्ध कराए और बदले में आर्थिक लाभ (Yamunanagar Triple Murder Case) व महंगे उपहार स्वीकार किए।
जेल से रची गई थी हत्या की साज़िश
26 दिसंबर 2024 को हुए इस हत्याकांड में पंकज मलिक, वीरेंद्र राणा और अर्जुन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। STF की जांच में स्पष्ट हुआ कि इस पूरी वारदात की योजना जगाधरी जेल में बंद काला राणा ने बनाई थी। उसने जेल के भीतर से ही विदेश में बैठे अपने भाई नोनी राणा और गुर्गे सन्नी सलेमपुर के साथ संपर्क साधा और हत्याकांड को अंजाम दिलवाया।
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STF के अनुसार, उनके पास पुख्ता साक्ष्य हैं कि जेल अधीक्षक को जेल के भीतर मोबाइल सुविधा देने के बदले रिश्वत दी गई थी। बैंक रिकॉर्ड्स की जांच में लगभग 33,040 रुपये के महंगे जूते और एक राडो घड़ी जेल अधीक्षक तक पहुँचने के सबूत मिले हैं। साथ ही, जेल परिसर में मोबाइल लोकेशन मिलने की पुष्टि STF इंचार्ज दिपेंद्र ने भी की है।
Yamunanagar Triple Murder Case – मामले में घिरे तत्कालीन जेल अधीक्षक विशाल छिब्बर की अग्रिम जमानत याचिका को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दिया है। अदालत ने उन्हें 10 जून को निचली अदालत (JMIC पीयूष चौधरी) में पेश होने का आदेश दिया है। वहीं, सह-आरोपी हैड वार्डर दीप चंद ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है।
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