मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ी उठापटक के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कुछ सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की खबरों के (emergency meeting of MP’s) बीच उद्धव ठाकरे ने रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को थामने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
emergency meeting of MP’s – पिछले कुछ दिनों से राज्य की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ नामक एक शब्द ने हलचल मचा दी है। राजनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि उद्धव गुट के कई नेता और सांसद अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और वे शिंदे खेमे के संपर्क में बने हुए हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने पार्टी के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है।
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लोकसभा चुनाव में मिले बेहतर प्रदर्शन से उत्साहित उद्धव गुट के लिए यह संकट किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा। आगामी मुंबई महानगरपालिका और विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सभी दल अपनी ताकत बढ़ाने में लगे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस दौर में कोई बड़ा चेहरा पाला बदलता है, तो यह केवल संख्याबल का नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी होगा, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है।
उद्धव ठाकरे का ‘एकजुटता’ संदेश
उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन में अनुशासन और एकजुटता का संदेश देना है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि बैठक के जरिए न केवल अटकलों को खारिज किया जाए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सांसद और नेता नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। दूसरी ओर, एकनाथ शिंदे गुट की बढ़ती सक्रियता ने इस स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
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