अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान के रूप में मिले रुपयों के बाद अब ‘सोने के चढ़ावे’ को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि श्रद्धालु जो सोना रामलला को चढ़ाने के लिए देते थे, उसका कोई पारदर्शी रिकॉर्ड नहीं रखा गया। यदि जांच में यह गबन साबित होता है, तो यह घोटाला करोड़ों रुपये का हो सकता है। फिलहाल, SIT इस पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी है।
🏛️ मिंट कॉरपोरेशन (SPMCIL) को क्यों नहीं मिली जगह?
भविष्य में ऐसी गड़बड़ी न हो, इसके लिए वित्त मंत्रालय और सरकारी संस्था SPMCIL (सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) के बीच एक करार हुआ था। योजना थी कि मंदिर परिसर में ही काउंटर खुलेगा, जहाँ श्रद्धालु सोना दान करेंगे और बदले में उन्हें रसीद मिलेगी। इस सोने से रामलला के धार्मिक सिक्के बनाने की तैयारी थी। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि मंदिर प्रबंधन द्वारा जानबूझकर मिंट कॉरपोरेशन को उचित जगह नहीं दी गई, जिससे यह पारदर्शी व्यवस्था लागू ही नहीं हो सकी।
🕵️ चढ़ावे के सोने में कैसे हुई गड़बड़ी?
मंदिर में सोना तीन अलग-अलग माध्यमों से इकट्ठा किया जा रहा था—दान पेटी में, मूर्ति पर चढ़ाकर और पुजारियों के माध्यम से। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंपत राय के माध्यम से सोना टुन्नू यादव तक पहुँचता था, जहाँ उसका हिसाब-किताब संदिग्ध है। सवाल यह है कि यदि दान में आए सोने का सही हिसाब बैंक में जमा होता, तो टुन्नू यादव के घर से इतनी बड़ी मात्रा में सोना कैसे बरामद हुआ?
🔍 SIT की रडार पर पूरा सिस्टम
अयोध्या में मंदिर का काम संभाल रहे लोगों पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी अधिकारियों को दरकिनार कर दिया। अब SIT इस बात की पड़ताल कर रही है कि वास्तव में कितना सोना दान में आया और उसमें से कितना बैंक तक पहुँचा। इस पूरे मामले में मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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