मुरैना: मुरैना नगर निगम में महापौर शारदा सोलंकी और पार्षदों के बीच का विवाद अब गंभीर राजनीतिक मोड़ ले चुका है। भ्रष्टाचार के आरोपों और लेखपाल की नियुक्ति को लेकर सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दलों के पार्षदों ने महापौर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों द्वारा चंबल आयुक्त को ज्ञापन सौंपने के एक दिन बाद ही (clash in municipal corporation) महापौर ने एमआईसी (MIC) भंग कर दी है, जिससे निगम में हड़कंप मच गया है।
पार्षदों ने एकजुट होकर लेखपाल की नियुक्ति को निरस्त करने की मांग की है। इस मांग में भाजपा के अपने पार्षदों के साथ-साथ कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय पार्षद भी शामिल हैं। पार्षद बदन सिंह यादव का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जनहित और निगम की पारदर्शिता के लिए है। उनका कहना है कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं।
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इस पूरे घटनाक्रम के बाद नाराज पार्षद भाजपा कार्यालय पहुंचे और जिला अध्यक्ष से मुलाकात की। भाजपा जिलाध्यक्ष कमलेश कुशवाह ने कहा कि वे महापौर के साथ बैठकर बातचीत करेंगे और आपसी मतभेदों को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधियों और निगम प्रशासन के बीच समन्वय होना आवश्यक है, ताकि विकास कार्यों में बाधा न आए।
आगे क्या होगा?
clash in municipal corporation – बीजेपी के बागी तेवर और एमआईसी भंग होने के बाद अब गेंद वरिष्ठ नेतृत्व के पाले में है। जहां पार्षदों ने जनहित के मुद्दों पर अपना संघर्ष जारी रखने की चेतावनी दी है, वहीं जिला नेतृत्व अब इस विवाद को थामने की कोशिश में जुटा है।

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