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Moscow Drone Attack: यूक्रेन का मॉस्को पर सबसे बड़ा हमला; रूसी S-400 सिस्टम क्यों हुआ फेल?

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मॉस्को: यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला करके युद्ध की दिशा में एक बड़ा बदलाव कर दिया है। 200 से अधिक ड्रोन हमलों के कारण एक ऑयल रिफाइनरी में आग लग गई और व्यापक नुकसान हुआ। रूसी एयर डिफेंस ने सैकड़ों ड्रोन मार गिराने का दावा तो किया, लेकिन रूस का सबसे आधुनिक S-400 डिफेंस सिस्टम इस हमले को पूरी तरह रोकने में विफल रहा।

📡 1. रडार का ‘ब्लाइंड स्पॉट’

S-400 सिस्टम को मुख्य रूप से ऊँची उड़ान भरने वाले विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए डिजाइन किया गया है। हमलावर ड्रोन जमीन के बेहद करीब और इमारतों की आड़ लेकर उड़े। पृथ्वी की गोलाई के कारण रडार के ‘ब्लाइंड स्पॉट’ (Radar Horizon) का लाभ उठाकर ये ड्रोन रडार की नजरों से बचते हुए मॉस्को के करीब पहुँच गए।

📊 2. ‘सैचुरेशन अटैक’ से सिस्टम हुआ ओवरलोड

यूक्रेन ने एक साथ सैकड़ों असली और नकली ड्रोन भेजकर ‘सैचुरेशन अटैक’ किया। जब एक साथ बड़ी संख्या में निशाने रडार पर आते हैं, तो S-400 का कमांड पोस्ट डेटा प्रोसेस करने में ओवरलोड हो जाता है। सिस्टम तय ही नहीं कर पाता कि किस खतरे को प्राथमिकता दी जाए, जिससे उसकी मारक क्षमता सीमित हो गई।

🛡️ 3. लेयर्ड डिफेंस में तालमेल की कमी

S-400 को सुरक्षित रहने के लिए ‘पंतसिर’ या ‘बुक’ जैसे छोटे एयर डिफेंस सिस्टम का सपोर्ट चाहिए होता है। मॉस्को में यह सुरक्षा नेटवर्क आपस में तालमेल नहीं बिठा पाया। जब S-400 बड़ी दूरी के खतरों में उलझा था, तब छोटे ड्रोन इस सुरक्षा चक्र को तोड़कर अंदर घुस आए।

💰 4. लागत और संसाधनों का संकट

S-400 की एक मिसाइल की कीमत करोड़ों में है, जबकि यूक्रेन के ड्रोन बेहद सस्ते हैं। युद्ध के कारण रूस के पास इन आधुनिक मिसाइलों का स्टॉक भी कम हो रहा है। इसके अलावा, युद्ध के दौरान रूस के कई S-400 सिस्टम पहले ही तबाह हो चुके हैं, जिससे उनकी मौजूदा संख्या और सक्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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