पश्चिम बंगाल में लगातार 15 साल तक एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) चुनाव में शिकस्त खाने के बाद से लगातार गहरे संकट में घिरी हुई है. हालात यह हो गए हैं कि साल 1998 में बनी ममता की यह पार्टी आज अपने सबसे बड़े अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है. विधानसभा (biggest rebellion in TMC) चुनावों में बीजेपी (BJP) से करारी हार का सामना करने के बाद, पार्टी अब इतिहास की अपनी पहली सबसे बड़ी खुली बगावत से जूझ रही है.
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biggest rebellion in TMC – यही ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’ 4 मई को पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद से पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है. पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में पार्टी में मची इस ऐतिहासिक बगावत के बाद भी यह पूरी ब्रिगेड शांत ही दिख रही है. सियासी गलियारों में यह कयास भी तेज हैं कि इसके कई बड़े सदस्यों ने या तो खामोशी का चोला ओढ़ लिया है या फिर वे पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा पर नए सिरे से विचार करने में जुट गए हैं.
ऋतब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के साथ दी ‘असली टीएमसी’ की चिट्ठी
नतीजों की घोषणा के बाद से ही बारासात की वरिष्ठ महिला सांसद काकोली घोष दस्तीदार का रुख पूरी तरह बागी बना हुआ है. उन्होंने टीएमसी में अपने सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है और सार्वजनिक रूप से पार्टी लीडरशिप से अपनी नाराजगी जाहिर की है, यहां तक कि वह नए सीएम शुभेंदु अधिकारी की बुलाई गई एक बैठक में भी शामिल हुई थीं. सबसे बड़ा झटका पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने दिया है, जो अब विधानसभा में विपक्ष के नेता बनने की कोशिश में जुट गए हैं. उन्होंने 58 अन्य बागी विधायकों के साथ मिलकर विधानसभा स्पीकर को एक आधिकारिक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने खुद के गुट को ही “असली” तृणमूल कांग्रेस बताया है.
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