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सावधान ! बॉडी बिल्डिंग की दौड़ में लिवर हो सकता है डैमेज : डॉक्टर कार्तिक साहनी

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नई दिल्ली : जिम और फिटनेस का बढ़ता क्रेज युवाओं को तेजी से सप्लीमेंट्स की ओर आकर्षित कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जांच-पड़ताल के इस्तेमाल किए गए कुछ सप्लीमेंट्स गंभीर (race of body building) स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं।

शक्ति नगर स्थित साहनी गैस्ट्रो एंड लिवर केयर के फाउंडर एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर कार्तिक साहनी के मुताबिक, बाजार में उपलब्ध हर प्रोटीन सप्लीमेंट सुरक्षित नहीं होता। कुछ उत्पादों में ऐसे तत्व हो सकते हैं जिनका उल्लेख लेबल पर भी नहीं किया जाता। इनमें एनाबॉलिक स्टेरॉयड, भारी धातुएं (हेवी मेटल्स) और अन्य हेपाटोटॉक्सिक रसायन शामिल हो सकते हैं, जो लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

डॉ. साहनी का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को सप्लीमेंट लेने के बाद थकान, भूख कम लगना, एसिडिटी, आंखों में पीलापन या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत सप्लीमेंट का सेवन बंद कर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

ऐसा ही एक मामला 28 वर्षीय एक फिटनेस प्रेमी का सामने आया, जिसने जिम ट्रेनर की सलाह पर एक प्रोटीन सप्लीमेंट लेना शुरू किया। शुरुआती दिनों में उसे तेजी से मांसपेशियों की वृद्धि और बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद उसे लगातार थकान, भूख कम लगना, एसिडिटी और आंखों में पीलापन जैसी समस्याएं होने लगीं।

race of body building – जांच में उसके लिवर एंजाइम्स का स्तर काफी बढ़ा हुआ पाया गया। आगे की मेडिकल जांच में पता चला कि जिस सप्लीमेंट का वह सेवन कर रहा था, उसमें बिना जानकारी दिए एनाबॉलिक स्टेरॉयड और लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले रसायन मौजूद थे। परिणामस्वरूप उसे क्रॉनिक लिवर डैमेज की समस्या का सामना करना पड़ा।

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