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रामगढ़ पर्वत बचाने के आंदोलन में कूदा ‘जनजातीय सुरक्षा मंच’; गणेश राम भगत ने बताया इसे जन आंदोलन

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सरगुजा : सरगुजा क्षेत्र में रामगढ़ पर्वत को बचाने के लिए चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने इस आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह महज एक आंदोलन नहीं, बल्कि ‘जन आंदोलन’ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म, संस्कृति, (movement to save mountain) राम मंदिर और देवगुड़ियों की रक्षा के लिए मंच हर संभव भूमिका निभाएगा।

गणेश राम भगत ने हाल ही में दिल्ली में आयोजित ‘जनजातीय सांस्कृतिक समागम’ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंच ने देश भर के आदिवासियों के साथ आरक्षण के नाम पर हो रहे भेदभाव को दूर करने के लिए ‘डीलिस्टिंग कानून’ की पुरजोर मांग की है। इस संबंध में उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत कराया है।

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movement to save mountain – गणेश राम भगत ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई उन आदिवासियों के खिलाफ है जो धर्म परिवर्तन कर चुके हैं। मंच की मांग है कि ऐसे लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से बाहर किया जाए और उन्हें आरक्षण के लाभों से वंचित रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार से उम्मीद तो है, लेकिन जब तक उनकी डीलिस्टिंग की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनका यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन जारी रहेगा।

 सरगुजा से दिल्ली तक सियासत

जशपुर से उठी यह डीलिस्टिंग की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। छत्तीसगढ़ की सियासत में भी इसे लेकर गहमागहमी तेज है। जनजातीय सुरक्षा मंच का मानना है कि आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं आदिवासियों को मिलना चाहिए जो अपनी मूल संस्कृति और परंपराओं का पालन कर रहे हैं।

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