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सीजफायर के बीच ईरान का कुवैत पर बड़ा हमला; अमेरिकी बेस बने निशाने, जानें क्यों बदल गई ईरान की रणनीति

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सीजफायर की संभावनाओं के बीच ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष एक (Iran-Kuwait Conflict) नया मोड़ ले चुका है। पिछले 72 घंटों में ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दो बड़े हमले किए हैं। ईरान का दावा है कि ये हमले अमेरिका     से बदला लेने के लिए किए जा रहे हैं। अब तक यूएई को निशाना बनाने वाला ईरान अचानक कुवैत को क्यों निशाना बना रहा है, यह रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

🎯 ईरान की रडार पर कुवैत क्यों?

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने ‘नो-रिस्क’ रणनीति के तहत कुवैत को चुना है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं:

    • रणनीतिक महत्व: कुवैत में अमेरिका के प्रमुख सैन्य बेस जैसे कैंप अरिफिजान, कैंप बुहिरिंग और अल सलेम एयरबेस स्थित हैं, जहाँ अमेरिका के लगभग 13,000 जवान तैनात हैं।

    • कूटनीतिक कमजोरी: यूएई के मुकाबले कुवैत को कूटनीतिक रूप से थोड़ा कम सक्रिय माना जाता है, जिससे ईरान को लगता है कि वहाँ जवाबी कार्रवाई का खतरा कम है।

    • पलटवार का डर: यूएई के पास अपनी मजबूत रक्षा प्रणाली है और वह सीधे ईरान पर पलटवार करने में सक्षम है। ईरान फिलहाल खाड़ी युद्ध को और अधिक विस्तृत करने के बजाय सीमित हमलों पर ध्यान दे रहा है।

       

⚠️ क्या खाड़ी युद्ध फिर से भड़केगा?

ईरान और अमेरिका के बीच समझौते को लेकर बातचीत का दौर भी जारी है। हालांकि, जमीन पर हो रहे ये सैन्य हमले इस बातचीत की सफलता पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। फिलहाल, कुवैत में (Iran-Kuwait Conflict) तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर बारीकी से नजर रखे हुए है।

 

 

 

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