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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें बढ़ाएंगी महंगाई; दूध-सब्जी से लेकर सीमेंट तक होगा महंगा, CRISIL की रिपोर्ट

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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही निरंतर वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति-जनित दबाव (Inflationary Pressure) बढ़ा सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन के बढ़ते दाम न केवल परिवहन लागत बढ़ा रहे हैं, बल्कि विनिर्माण (Manufacturing) लागत में भी वृद्धि कर रहे हैं। यदि कच्चे तेल (Fuel Price Hike Impact) की कीमतें इसी तरह उच्च स्तर पर बनी रहीं, तो भविष्य में ईंधन के दाम 10 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ सकते हैं।

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Fuel Price Hike Impact  – रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लगभग 71 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है, जिसमें लागत का 42 प्रतिशत हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च होता है। ईंधन की कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि से खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) में लगभग 0.36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। यदि यह वृद्धि 10 रुपये तक पहुंचती है, तो महंगाई का आंकड़ा 0.48 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ेगा, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आएगी।

🛒 आपकी जेब पर और बढ़ेगा महंगाई का बोझ

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन नेटवर्क पर निर्भर रहने वाले खाद्य उत्पाद—जैसे दूध, फल, दालें, चाय-कॉफी, मसाले, अंडे, मांस और मछली—महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, सीमेंट और सिरेमिक जैसे क्षेत्रों में भी लागत बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए मजबूर हो सकती हैं, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

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