Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
भारत की राष्ट्रपति ने भारत-उत्‍तर मैसिडोनिया व्यापार मंच को संबोधित किया। जनवरी 2021 से जून 2026 के बीच 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खतरनाक सीवर और सेप्टिक टैंक की... चित्रकूट में अवैध शराब कारोबार पर आबकारी विभाग का बड़ा प्रहार, 300 किलो लहन नष्ट, 20 लीटर कच्ची शराब... चित्रकूट कोठी तालाब का डीएम ने किया निरीक्षण। प्रधानमंत्री ने वियतनाम के फू क्वोक के पास भारतीय नागरिकों की नाव दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया। CM YOGI LIVE:- बांदा में 710 करोड़ + लागत की 229 विकास परियोजना का लोकार्पण/ शिलान्यास। सरकार ने प्याज की खरीद कीमत में 13 प्रतिशत की वृद्धि जिससे प्याज किसानों को बेहतर मुनाफा मिलेगा और ब... केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज से शुरु हुई अमरनाथ यात्रा के दर्शन-पूजन के लिए जाने... बांदा डीएम ने बांदा को हरा भरा करने के उद्देश्य से पौधों की निकली बारात डीएम की मुहिम को जमीन पर लान... मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश में एनएच-34 के कानपुर-कबराई खंड के 4/6 लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड खंड के न...

ममता बनर्जी की ‘शिष्या’ सयानी घोष का हृदय परिवर्तन; टीएमसी छोड़ एनडीए के साथ जाने की चर्चा

3

कोलकाता : राजनीति में न तो समर्पण स्थायी है और न ही विरोध। इसका सबसे बड़ा उदाहरण बंगाल की राजनीति में सयानी घोष का हालिया रुख है। कभी ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और ‘फायरब्रांड’ युवा नेता के रूप में पहचानी जाने वाली सयानी घोष ने अब पाला बदल लिया है। ममता की सियासी प्रयोगशाला (Sayani Ghosh’s change of heart) से निकली सयानी का यह ‘हृदय परिवर्तन’ बंगाल की राजनीति के लिए किसी झटके से कम नहीं है।

  ममता की प्रयोगशाला से निकलकर बनीं ‘युवा चेहरा’

वर्ष 2021 में तृणमूल कांग्रेस में कदम रखने वाली बंगाली अभिनेत्री और गायिका सयानी घोष ने बहुत कम समय में खुद को साबित किया। ममता बनर्जी को उस समय ऐसे युवा चेहरों की तलाश थी जो सोशल मीडिया और सड़क, दोनों जगहों पर आक्रामक तरीके से पार्टी का पक्ष रख सकें। सयानी इस कसौटी पर खरी उतरीं। उन्हें युवा तृणमूल कांग्रेस की कमान सौंपी गई—वही पद, जो कभी ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के पास था।

इसे भी पढ़ें – West Bengal News : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने किया विभागों का बंटवारा; जानें किसे मिला कौन सा मंत्रालय

Sayani Ghosh’s change of heart – सयानी घोष को ममता बनर्जी की ‘परछाई’ माना जाता था। उनके भाषणों की शैली, बीजेपी पर तीखे हमले और बंगाली अस्मिता का मुद्दा उठाना—सब कुछ ममता बनर्जी की कार्यशैली का प्रतिबिंब था। सयानी ने भी पार्टी के प्रति अपनी वफादारी का परिचय देते हुए राज्य में युवाओं और महिलाओं के बीच पैठ बनाई। इस जोड़ी को बंगाल में ‘गुरु-शिष्या’ के एक आदर्श उदाहरण के रूप में देखा जाता था।

 सत्ता की आंधी और टूटता भरोसा

विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल में बदली सियासी परिस्थितियों ने सब कुछ बदल दिया। टीएमसी की सत्ता से बाहर होने की आहट और बीजेपी के उभार ने सयानी घोष को एक नई दिशा में सोचने पर मजबूर कर दिया। माना जा रहा है कि सयानी घोष ने अब हवा का रुख भांप लिया है और टीएमसी के उन बागी सांसदों की सूची में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है।

Comments are closed.