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Ram Mandir Donation Controversy: दान घोटाले के आरोपों पर नृपेंद्र मिश्रा का बड़ा खुलासा; कहा- ‘निगरानी व्यवस्था में थी कमी’

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अयोध्या: राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने हालिया दान विवाद और जमीन खरीद से जुड़े तमाम आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि मंदिर परिसर की निगरानी व्यवस्था में खामियां थीं, जिसके कारण दान चोरी की घटना हुई। उन्होंने बताया कि कैसे शौचालय के (revelation on donation scam allegations) पास धनराशि मिलने के बाद महासचिव चंपत राय ने तुरंत मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने का निर्णय लिया।

 800 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी पर सवाल

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मंदिर परिसर में करीब 800 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और कंट्रोल रूम की देखरेख पुलिस करती है। इसके बावजूद घटना का होना यह दर्शाता है कि सीसीटीवी की निगरानी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि दान काउंटिंग के लिए सख्त नियम हैं, जैसे कि काउंटिंग टीम के कपड़ों में जेब नहीं होनी चाहिए, फिर भी ऐसी चूक होना चिंताजनक है।

 चंपत राय पर बोले नृपेंद्र मिश्रा

महासचिव चंपत राय पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए मिश्रा ने कहा कि वे मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और निष्कलंक हैं। उन्होंने कहा, “वो प्रबंधन के मुखिया हैं, इसलिए सवाल उठ रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे इसमें शामिल हैं।” उन्होंने माना कि मुख्य समस्या मंदिर परिसर की लचर निगरानी व्यवस्था है।

 जमीन खरीद प्रक्रिया: पारदर्शिता का अभाव

अयोध्या में जमीन खरीद से जुड़े विवाद पर नृपेंद्र मिश्रा ने माना कि प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी हो सकती थी। उन्होंने कहा, “अयोध्या में जमीनें ज्यादातर ‘नजूल’ की हैं, जिससे रिकॉर्ड और मालिक के नाम में मेल न होने जैसी कठिनाइयां आती हैं। जिस सावधानी से खरीद होनी चाहिए थी, वह नहीं हुई। पहली खरीद एक (revelation on donation scam allegations) सीख थी, जिसे अब दुरुस्त कर लिया गया है।”

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