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शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से हैं परेशान? शनिवार को करें इन 5 महामंत्रों का जाप, तुरंत मिलेगी राहत

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हिंदू धर्म शास्त्रों में शनि देव को मनुष्यों के कर्मों का फल देने वाला देवता और ब्रह्मांड का मुख्य न्यायाधीश कहा गया है. वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि देव को नवग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली स्थान (Shani Sade Sati Mantra) दिया गया है. सभी ग्रहों में से शनि की चाल सबसे धीमी होती है, जिसके कारण इनका प्रभाव जातक पर लंबे समय तक रहता है.

🕉️ शनिवार की पूजा और व्रत से कम होगा साढ़ेसाती का प्रकोप 

यही सब मुख्य कारण हैं कि आम जनमानस को शनि की साढ़ेसाती का भय हमेशा सताता रहता है. शनि की साढ़ेसाती तीन अलग-अलग चरणों में कुल साढ़े सात साल तक चलती है, लेकिन धर्म शास्त्रों में इसका समाधान (Shani Sade Sati Mantra) भी बताया गया है. शनिवार के दिन पूर्ण निष्ठा के साथ शनि देव की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से शनि देव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और साढ़ेसाती के अशुभ प्रभावों से पीड़ित जातक को बड़ी राहत मिलती है.

    • मंत्र १:

ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। संयोरभिश्रवन्तु न:। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।।

    • मंत्र २:

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामिशानश्चराम।।

    • मंत्र ३:

ॐ शन्नोदेवीरभिस्ताय आपो भवन्तु पीतये, शनयोरभिस्रवन्तु नः, ॐ समं शनैश्चराय नमः

    • मंत्र ४:

ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजं, छायामार्तण्डसंभूतं तम नमामि शनैश्चरम।

    • मंत्र ५ (महामृत्युंजय मंत्र):

ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुक मिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्।।

🌳 साढ़ेसाती और ढैय्या के अचूक पौराणिक उपाय 
    1. पीपल वृक्ष की पूजा: हर शनिवार की सुबह स्वच्छ स्नान करने के बाद पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें, सरसों के तेल का दीपक जलाएं और पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें.

    1. शनि स्तुति का पाठ: शनिवार के दिन शनि मंदिर में जाकर या घर के पूजा स्थल पर शनिदेव की विधि-विधान से पूजा करें और पूर्ण श्रद्धापूर्वक ‘शनि स्तुति’ का पाठ करें.

    1. बजरंगबली की शरण: शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि वे उनके भक्तों को कभी परेशान नहीं करेंगे. इसलिए शनिवार को संकटमोचन हनुमान जी की विशेष पूजा करें और नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें.

       

 

 

 

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