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AI की बढ़ती मांग से बढ़ रहा जल संकट; 2027 तक हालात हो सकते हैं गंभीर

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आज के दौर में एआई टूल्स हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया रिवरसाइड की एक हालिया रिसर्च ने एक चौंकाने वाला सच उजागर किया है। शोध के अनुसार, एआई के (Environmental Impact of AI) काम करने के पीछे एक बड़ी ‘जल खपत’ छुपी है। जब आप एआई से 100 शब्द लिखवाते हैं, तो इस काम को अंजाम देने के लिए डेटा सेंटर्स को लगभग 519 मिलीलीटर पानी की आवश्यकता होती है, जो एक सामान्य पानी की बोतल के बराबर है।

 डेटा सेंटर्स और वाटर-बेस्ड कूलिंग सिस्टम

एआई मॉडल्स को चलाने के लिए विशाल डेटा सेंटर्स की जरूरत होती है, जिनमें हजारों सर्वर्स काम करते हैं। ये सर्वर्स भारी मात्रा में गर्मी उत्पन्न करते हैं। इस गर्मी को नियंत्रित करने के लिए ‘वाटर-बेस्ड कूलिंग सिस्टम’ का उपयोग किया जाता है, जो इन सर्वर्स को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी खर्च करता है। जैसे-जैसे एआई की मांग बढ़ रही है, डेटा सेंटर्स का आकार और उनकी संख्या भी बढ़ती जा रही है।

 2027 तक बढ़ सकता है जल संकट का खतरा

शोधकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, एआई के लिए पानी का स्रोत अक्सर ऐसे इलाके होते हैं जहाँ जलस्तर पहले से ही कम है। मेक्सिको, चिली और अमेरिका जैसे देशों में स्थानीय लोग डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को लेकर चिंतित हैं। यदि एआई का विस्तार इसी गति से जारी रहा, तो 2027 तक स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। अनुमान है (Environmental Impact of AI) कि एआई की जल खपत उस स्तर तक पहुंच सकती है, जो ब्रिटेन के एक साल के कुल भूजल निष्कर्षण का लगभग आधा हिस्सा हो।

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