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तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने किया NCPI में विलय; जानिए इस पार्टी का इतिहास और नेतृत्व

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नई दिल्ली : भारतीय राजनीति में एक ऐसा नाम सुर्खियों में है, जिसे शायद ही किसी ने पहले कभी सुना हो—‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI)। महज 822 वोटों के साथ त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में अपनी चुनावी पारी शुरू करने वाली यह अनजान पार्टी, आज तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के विलय के (Political Earthquake in Bengal) बाद दिल्ली की राजनीति का केंद्र बन गई है।

 त्रिपुरा से चुनावी डेब्यू 

NCPI का रजिस्ट्रेशन पश्चिम बंगाल में हुआ था, लेकिन उसने अपना राजनीतिक सफर त्रिपुरा से शुरू किया। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने आदिवासी समुदायों की आवाज उठाने का दावा किया था, लेकिन उसे कोई खास सफलता नहीं मिली। पार्टी के कई उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए और जो मैदान में उतरे, उन्हें 1,000 से भी कम वोट मिले। चुनाव के बाद पार्टी की सक्रियता लगभग समाप्त हो गई थी।

 पार्टी का ढांचा और संदिग्ध वित्तीय स्थिति

चुनाव आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, पार्टी को कुल 1.13 लाख रुपये का चंदा प्राप्त हुआ था। पार्टी की कोषाध्यक्ष शेवली कुंडू हैं, जो हावड़ा स्थित कुछ निजी संस्थाओं की डायरेक्टर भी हैं। पार्टी अध्यक्ष उत्तिया कुंडू के नेतृत्व में संचालित यह पार्टी लंबे समय से संसाधनों की कमी और आंतरिक विवादों से जूझ रही थी। पार्टी के पूर्व उम्मीदवारों ने भी स्वीकार किया कि चुनाव के बाद नेतृत्व से उनका संपर्क टूट गया था।

 विलय के बाद राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री

तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों द्वारा NCPI में विलय की घोषणा ने इसे रातों-रात ‘क्षेत्रीय पार्टी’ से ‘राष्ट्रीय चर्चा’ का विषय बना दिया है। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग (Political Earthquake in Bengal) संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग की है। टीएमसी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने इस विलय की पुष्टि की है।

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