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ट्राई साइकिल के लिए रेंगकर दफ्तर पहुंचा दिव्यांग; कागजी खानापूर्ति में फंसी जगदीश की उम्मीद

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गिरिडीह : गांडेय क्षेत्र के बेंगाबाद प्रखंड से एक बेहद भावुक करने वाली तस्वीर सामने आई है। फिटकोरिया पंचायत के अमजो गांव निवासी 45 वर्षीय जगदीश दास, जो जन्म से ही कमर के नीचे लकवाग्रस्त हैं, अपनी एकमात्र उम्मीद एक ट्राई साइकिल के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर ठोकरें खाने को मजबूर हैं। सोमवार को (disabled reached office by crawling) जब वे रेंगते हुए प्रखंड कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें केवल विभागीय प्रक्रिया का हवाला देकर खाली हाथ लौटा दिया गया।

disabled reached office by crawling – जगदीश दास के पास रेड क्रॉस सोसायटी से जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र तो है, लेकिन विभागीय नियमों के अनुसार ट्राई साइकिल के लिए सदर अस्पताल द्वारा जारी प्रमाण पत्र अनिवार्य है। इसी तकनीकी पेंच के कारण वर्षों से चलने-फिरने में असमर्थ जगदीश को सहायता नहीं मिल पा रही है। स्थानीय लोगों ने जब उनकी स्थिति देखी, तो वे खुद भी स्तब्ध रह गए।

 विभाग का पक्ष

बाल विकास परियोजना की लेखापाल नीताक्षी ने बताया कि विभागीय नियमों के कारण बिना ‘सदर अस्पताल’ के प्रमाण पत्र के ट्राई साइकिल आवंटित नहीं की जा सकती। हालांकि, उन्होंने जगदीश का आवेदन पत्र और तस्वीर सुरक्षित रख ली है और प्रक्रिया पूरी होते ही मदद का आश्वासन दिया है। लेकिन सवाल यह है कि एक दिव्यांग व्यक्ति, जो खुद चलने में असमर्थ है, वह सदर अस्पताल तक जाकर नई कागजी प्रक्रिया कैसे पूरी करेगा?

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