Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
आगामी दिनों में देवी प्रतिमा विसर्जन,और सुरक्षा की पैनी नजर व्यक्ति को कुल्हाड़ी मारकर हत्या करने वाले अभियुक्त को पुलिस ने पकड़ा मिशन शक्ति फेज तहत, एनसीसी छात्राओं ने संभाली यातायात व्यवस्था मिशन शक्ति के तहत अनूठा पहल, बालिकाओं ने संभाली जिम्मेदारी भारतीय जनता पार्टी ने आज राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी कर इंडिया गठबंधन की हवा निकाल दी सड़क सुरक्षा के लिए समर्पित शिक्षक डॉ. पीयूष मिश्रा का झांसी में सम्मान ब्रेकिंग: झांसी से कन्नौज तक सड़क पर हादसों का कहर, कहीं भिड़ंत के बाद धधका ऑटो तो कहीं चलती कार बनी... लगातार बदलते मौसम के बीच बारिश का कहर, भरभराकर गिरा मकान भारत की राष्ट्रपति ने भारत-उत्‍तर मैसिडोनिया व्यापार मंच को संबोधित किया। जनवरी 2021 से जून 2026 के बीच 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खतरनाक सीवर और सेप्टिक टैंक की...

NEET-UG Re-Exam Raipur: जेल की सलाखों से परीक्षा केंद्र तक; हत्या के आरोपी छात्र ने कड़ी सुरक्षा में दी नीट की परीक्षा

9

रायपुर: परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सपनों की उड़ान को कैद करना आसान नहीं होता। रायपुर सेंट्रल जेल में बंद एक छात्र कुणाल तरुणकर ने आज शिक्षा और न्याय के बीच संतुलन की एक अनूठी मिसाल पेश की। गंभीर आरोपों के चलते न्यायिक हिरासत में होने के बावजूद, हाईकोर्ट के विशेष आदेश पर उसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिला।

🚓 पुलिस और जेल प्रशासन की विशेष टीम की निगरानी में परीक्षा

कुणाल तरुणकर, जो रायपुर के शिवानंद नगर का निवासी है, उसे सुबह जेल से परीक्षा केंद्र तक लाने की जिम्मेदारी पुलिस और जेल प्रशासन की एक विशेष टीम ने संभाली। एएसआई, हवलदार और सिपाहियों के सुरक्षा घेरे में उसे डब्ल्यूआरएस कॉलोनी स्थित केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र पहुँचाया गया। सामान्य परीक्षार्थियों के बीच जेल से आए इस छात्र का वहां पहुँचना हर किसी के लिए चर्चा का विषय बन गया।

📜 हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण मानवीय आदेश

कुणाल पर एक युवती को आत्महत्या के लिए उकसाने का गंभीर आरोप है, जिसके चलते वह BNS की धारा 108 के तहत न्यायिक हिरासत में है। हालांकि, परीक्षा की तारीख नजदीक आने पर उसके अधिवक्ता अनुकूल विश्वास ने हाईकोर्ट में अर्जेंट सुनवाई की याचिका लगाई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक शिक्षा का अधिकार भी महत्वपूर्ण है। अदालत ने प्रशासन को छात्र को समय पर परीक्षा केंद्र पहुँचाने के निर्देश दिए थे।

🌟 सपनों की परीक्षा और भविष्य की अनिश्चितता

यह मामला समाज में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या किसी व्यक्ति का शैक्षणिक भविष्य तब तक समाप्त मान लिया जाना चाहिए जब तक कि अदालत का अंतिम फैसला न आ जाए? आज रायपुर में आरोपों के बोझ और सपनों के भार के बीच कानून ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए छात्र को अपने भविष्य के लिए संघर्ष करने का एक मौका दिया। अब परीक्षा परिणाम और न्यायालय का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि कुणाल के डॉक्टर बनने का सपना साकार होगा या नहीं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.