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भारत-चीन सीमा पर बसा 91 लोगों का चुमुर बनेगा देश का पहला ‘मॉडल सीमा गांव’

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भारत-चीन सीमा के बिल्कुल पास स्थित लद्दाख का एक बहुत छोटा सा गांव चुमुर, जिसमें सिर्फ 91 लोग रहते हैं, अब देश के नक्शे पर एक नई मिसाल पेश करने जा रहा है. यह रणनीतिक गांव अब भारत का पहला ‘मॉडल सीमा गांव’ (Model Border Village) बनने जा रहा है. लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना ने बुधवार को 16,700 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित चुमुर गांव का दौरा कर इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की आधिकारिक नींव रखी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए एलजी सक्सेना ने बताया कि इस गांव को केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत पूरी तरह विकसित किया जाएगा.

🏔️ चीन सीमा पर बसा 24 परिवारों का गांव 

सिर्फ 24 परिवारों और 91 लोगों की आबादी वाला यह खूबसूरत गांव चुमुर, भारत और चीन के बीच स्थित लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के बेहद करीब है. भौगोलिक दृष्टि से यह देश की सबसे दूरदराज की सीमाई बस्तियों में से एक माना जाता है. यहां के स्थानीय निवासी मुख्य रूप से विश्वप्रसिद्ध पश्मीना बकरियों को पालकर अपना जीवन-यापन करते हैं. इन बकरियों से मिलने वाली बेशकीमती ऊन ही यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था की मुख्य रीढ़ है.

🛑 पलायन रोकने के लिए केंद्र सरकार की बड़ी पहल 

ये वे सुदूर इलाके हैं जहां अत्यधिक खराब मौसम, बेहद मुश्किल रास्तों और आर्थिक मौकों (रोजगार) की भारी कमी की वजह से पूर्व में लोग मजबूरन बड़े शहरों की ओर पलायन कर गए थे. इसी को ध्यान में रखते हुए हाल के सालों में नीति निर्माताओं और रक्षा विशेषज्ञों ने सीमाई इलाकों में आम लोगों की आबादी को बनाए रखने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया है. सरकार का अब स्पष्ट मानना ​​है कि ऐसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में विकास का मतलब सिर्फ सड़कें (Model Border Village) बनाना या सैन्य बुनियादी ढांचा खड़ा करना ही नहीं होना चाहिए, बल्कि वहां रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और उन्हें हर बुनियादी सुविधा देना होना चाहिए.

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