Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
आगामी दिनों में देवी प्रतिमा विसर्जन,और सुरक्षा की पैनी नजर व्यक्ति को कुल्हाड़ी मारकर हत्या करने वाले अभियुक्त को पुलिस ने पकड़ा मिशन शक्ति फेज तहत, एनसीसी छात्राओं ने संभाली यातायात व्यवस्था मिशन शक्ति के तहत अनूठा पहल, बालिकाओं ने संभाली जिम्मेदारी भारतीय जनता पार्टी ने आज राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी कर इंडिया गठबंधन की हवा निकाल दी सड़क सुरक्षा के लिए समर्पित शिक्षक डॉ. पीयूष मिश्रा का झांसी में सम्मान ब्रेकिंग: झांसी से कन्नौज तक सड़क पर हादसों का कहर, कहीं भिड़ंत के बाद धधका ऑटो तो कहीं चलती कार बनी... लगातार बदलते मौसम के बीच बारिश का कहर, भरभराकर गिरा मकान भारत की राष्ट्रपति ने भारत-उत्‍तर मैसिडोनिया व्यापार मंच को संबोधित किया। जनवरी 2021 से जून 2026 के बीच 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खतरनाक सीवर और सेप्टिक टैंक की...

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें बढ़ाएंगी महंगाई; दूध-सब्जी से लेकर सीमेंट तक होगा महंगा, CRISIL की रिपोर्ट

14

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही निरंतर वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति-जनित दबाव (Inflationary Pressure) बढ़ा सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन के बढ़ते दाम न केवल परिवहन लागत बढ़ा रहे हैं, बल्कि विनिर्माण (Manufacturing) लागत में भी वृद्धि कर रहे हैं। यदि कच्चे तेल (Fuel Price Hike Impact) की कीमतें इसी तरह उच्च स्तर पर बनी रहीं, तो भविष्य में ईंधन के दाम 10 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ सकते हैं।

इसे भी पढ़ें – शेयर बाजार में भारी गिरावट; निवेशकों के 3.75 लाख करोड़ डूबे, जानें क्या हैं बाजार गिरने के बड़े कारण

Fuel Price Hike Impact  – रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लगभग 71 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है, जिसमें लागत का 42 प्रतिशत हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च होता है। ईंधन की कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि से खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) में लगभग 0.36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। यदि यह वृद्धि 10 रुपये तक पहुंचती है, तो महंगाई का आंकड़ा 0.48 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ेगा, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आएगी।

🛒 आपकी जेब पर और बढ़ेगा महंगाई का बोझ

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन नेटवर्क पर निर्भर रहने वाले खाद्य उत्पाद—जैसे दूध, फल, दालें, चाय-कॉफी, मसाले, अंडे, मांस और मछली—महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, सीमेंट और सिरेमिक जैसे क्षेत्रों में भी लागत बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए मजबूर हो सकती हैं, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

Comments are closed.